मैंने माना मेरे जाना
कि तुम्हारी डबडबाई आँखों का बाँध है वो काजल,
नदी उफन भी जाए, फिर भी दिखता नहीं रास्ता जो बनाया लहरों ने...
सबके पीछे तुम्हारा काजल
उतना ही काला, उतना ही गाढ़ा
अब भी बना हुआ है बाँध।
कि तुम्हारी डबडबाई आँखों का बाँध है वो काजल,
नदी उफन भी जाए, फिर भी दिखता नहीं रास्ता जो बनाया लहरों ने...
सबके पीछे तुम्हारा काजल
उतना ही काला, उतना ही गाढ़ा
अब भी बना हुआ है बाँध।
Umda :)
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