Thursday, December 12, 2013

बुना हुआ स्वेटर

बहुत छोटा था तो माँ ने एक स्वेटर बुना
आसमानी रंग का,
आसमान जितने ही असीम सपने बुने माँ ने उसमें
दो सलाइयों से बुन रही थी वो मेरा बड़ा ओहदा,
दुनिया में मेरा नाम, एक भारी भरकम तनख्वाह,

आज वो स्वेटर छोटा पड़ने लगा है मुझे
माँ उघाड़ रही है वो स्वेटर और
तैयारी कर रही है दुबारा बुनने की, और बड़ा बुनने की
मैं डरने लगा हूँ बुने हुए स्वेटर से…
माँ उसमें उम्मीदें बुन देती है यार।

Monday, November 11, 2013

छुपाना भी नहीं आता

मैंने कभी कुछ नहीं छुपाया
हर पन्ना पढ़ लेती है दुनिया हरदम,
पर साथी, जब छुपाना पड़ा खुद का होना
तो चीथड़े उड़ गए थे रूह के,
शायद तुम ये नहीं समझ सकते
कि मेरे लिए छुपाने का मतलब है 'मिटाना'
मैंने क़त्ल किया खुद को, अपने ही हाथों
तुम्हें दिखा भी नहीं होगा !
तुम्हारे सामने ही ये पहाड़, पिघल रहा था क़तरा क़तरा

Tuesday, July 16, 2013

नाक वाली लड़की के लिए

ये हवा जो मेरी सांस बनती है,
यहीं पहुंचाती है मेरे शब्द तुम तक।
तुम सुनती हो की सांस लेती हो,
उतर जाती है यहीं हवा तुम्हारे भीतर भी।

जूता, पैर और पैरों का मरना

जूतों में रखे मेरे पांव
नंगे पैरों को नहीं छूते
एक खाल जो किसी और खाल से घिरी हो
एक और खाल को कैसे महसूस करे वो ...
जिसे छूना है और जिसको छूना है
उनकी खालें सांस लेती हैं
पर वो बीच का जूता
जो मैंने बनाया है, ताकी हवा, पानी, धूप
सबसे बचाए रखूँ अपने पैर।
वो बेजान खाल आती है,
मेरे और तुम्हारे जिंदा खालों के बीच,
और रोक देती है साँसों का बहाव।
मेरे पैर यूँ ही मर गए घुटन से इन जूतों में,
और तुम्हारे मरे तब, जब मैं इन जूतों समेत
तुम्हारे पैरों से होकर गुज़रा।
मैंने बताया ना !
इस दौरान मुझे महसूस नहीं हुए
तुम्हारे पांव।
जब दरवाजा बंद करके तुम उस पार जाओगी,
मैं खड़ा नहीं रहूँगा इस पार
मैं चल दूंगा कहीं।
जब तुम दरवाजे के उस पार सब घूम लेना,
और मैं दरवाजे के इस पार घूम लूँगा सब,
तब हम फिर मिलेंगे उसी दरवाजे पर
खड़े होकर बीच में,
न इस पार, न उस पार
यार !
हम मिलेंगे न यार !

Saturday, January 5, 2013

बाबा के लिए

वो मुझे बनाना चाहते थे, मैं बना, जितना भी बना, मैं बना.
अब मैं उन्हें बनाना चाहता हूँ, वो बनते ही नहीं.