Thursday, December 12, 2013

बुना हुआ स्वेटर

बहुत छोटा था तो माँ ने एक स्वेटर बुना
आसमानी रंग का,
आसमान जितने ही असीम सपने बुने माँ ने उसमें
दो सलाइयों से बुन रही थी वो मेरा बड़ा ओहदा,
दुनिया में मेरा नाम, एक भारी भरकम तनख्वाह,

आज वो स्वेटर छोटा पड़ने लगा है मुझे
माँ उघाड़ रही है वो स्वेटर और
तैयारी कर रही है दुबारा बुनने की, और बड़ा बुनने की
मैं डरने लगा हूँ बुने हुए स्वेटर से…
माँ उसमें उम्मीदें बुन देती है यार।