एक दिन मैं चला
बस यूँ ही चल दिया
चलना अच्छा लगा
तो फिर बढ़ा
चलना भी और अच्छा लगना भी
सिर्फ मैं ही नहीं रास्ता भी चला मेरे साथ
सिर्फ मुझे ही नहीं
उसे भी अच्छा लगा
फिर मैं कुछ तेज चला
इतना तेज कि रस्ते को लगा
मैं दौड़ रहा हूँ
वो अब भी चल रहा था
पर मैं अब दौड़ रहा था
इतनी तेज कि मुझे लगा
वो रुक गया है
अब वो चले तब तो चलूँ
वो कहे तब तो बढूँ
पर वो दूर कहीं पीछे
कुछ कह रहा है
मैं दूर कहीं आगे
कुछ सोच रहा हूँ
सोच रहा हूँ कि
मैं तो चला ही था
रुकने के लिए
अरे भाई
मैं तो दौड़ा ही था
रुकने के लिए ...