मैंने कभी कुछ नहीं छुपाया
हर पन्ना पढ़ लेती है दुनिया हरदम,
पर साथी, जब छुपाना पड़ा खुद का होना
तो चीथड़े उड़ गए थे रूह के,
शायद तुम ये नहीं समझ सकते
कि मेरे लिए छुपाने का मतलब है 'मिटाना'
मैंने क़त्ल किया खुद को, अपने ही हाथों
तुम्हें दिखा भी नहीं होगा !
तुम्हारे सामने ही ये पहाड़, पिघल रहा था क़तरा क़तरा
हर पन्ना पढ़ लेती है दुनिया हरदम,
पर साथी, जब छुपाना पड़ा खुद का होना
तो चीथड़े उड़ गए थे रूह के,
शायद तुम ये नहीं समझ सकते
कि मेरे लिए छुपाने का मतलब है 'मिटाना'
मैंने क़त्ल किया खुद को, अपने ही हाथों
तुम्हें दिखा भी नहीं होगा !
तुम्हारे सामने ही ये पहाड़, पिघल रहा था क़तरा क़तरा