Saturday, July 17, 2010

अनाम

खेत खलिहानों के बीचों बीच
खड़े होकर देखा आकाश को
अद्भुत प्रयास था धरती को छूने का
अथक पर असफल
क्या मेरे साथ भी ऐसा होगा कल ?
बताओ ना...
क्या हर बार प्यार में ऐसा ही होता है ?
शायद हर लम्हा हर पल
इसीलिए तो कहता हूँ ,
मत दो इस रिश्ते को कोई नाम
और जीता हूँ
चुपचाप...
रिश्ता ये अनाम

1 comment:

  1. this is beautiful vikas :)
    undontional love..jaha shartein nahi.. :)

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