Friday, July 16, 2010

कविता की पहली खेप

वो...

चीजें अच्छी होती हैं बहुत सारी

पर होती हैं उनमे से कुछ खास

कुछ जरूरते, तो कुछ चाहतें

कुछ मिल गयी हैं, पर कुछ हैं अनछुई

...वो भी अच्छी है

न खास, न जरुरी

मिली भी नहीं, ना है अभी अनछुई

पर कुछ तो है,

आखिर वो जो है

1 comment:

  1. hehe!
    main aaj is poem ko samajh pai hu!:)
    especially the line..WO BHI ACHHI HAI :)
    simple yet beautiful :)

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